डिजिटल डेस्क, लखनऊ। हाथरस केस में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा खुलासा किया है। प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को दंगा भड़काने के लिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की फंडिंग हुई। अकले मॉरिशस से 50 करोड़ आए थे। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में ये भी पता चला था कि पीड़िता को न्याय दिलाने के नाम पर रातों-रात एक वेबसाइट बनाई गई थी। इसके जरिए यूपी में जातीय दंगा फैलाना की साजिश रची गई। वेबसाइट के माध्यम से इस्लामिक देशों से फंडिंग भी की गई। वहीं मंगलवार को हाथरस में दंगे की साजिश रचने के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया था। ये सभी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्य बताए जा रहे हैं। इनके पास से भड़काऊ साहित्य भी मिले थे।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि हाथरस के बूलगढ़ी गांव में 14 सितंबर को 4 लोगों ने 19 साल की लड़की से गैंगरेप किया था। आरोपियों ने लड़की की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ भी काट दी थी। दिल्ली में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई। चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि दुष्कर्म नहीं हुआ था। सियासी संग्राम के बीच योगी सरकार ने शनिवार को हाथरस गैंगरेप मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए, लेकिन पीड़ित परिवार इस पर संतुष्ट नहीं है। पीड़ित के भाई ने कहा कि हम चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में मामले की जांच की जाए। मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, पीड़िता का रात में दाह संस्कार कराने को लेकर प्रशासन निशाने पर था। गैंगरेप की शिकार दलित लड़की के पिता हो या भाई, चाचा हो या कोई अन्य रिश्तेदार, सब एक सुर से पुलिस पर जबरन दाह संस्कार कराने का आरोप लगा रहे हैं।
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