डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो कि आज सोमवार को की जा रही है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा से सुख-संपदा मिलती है और जीवन आनंदित होता है। मान्यता है कि माता रानी का चंद्रघंटा स्वरूप भक्तों को निर्भय और सौम्य बनाता है। ज्योतिषियों के अनुसार माना जाता है कि जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर होता है। उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
माता चंद्रघंटा अपने सच्चे भक्तों को इस लोक और परलोक में कल्याण प्रदान करती है और भगवती अपने दोनों हाथो से साधकों को लम्बी आयु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती है। वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।
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इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें।
स्वरुप
मां चंद्रघंटा का रूप अत्यंत ही सौम्य होने के साथ अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी माना गया है। इनका शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है, इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो कि विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की दिन विधि पूर्वक पूजा करने से भक्त को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार मान्यता यह भी है कि माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से भक्तों को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त मिलती है।
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ऐसे करें पूजा
मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
इस मंत्र का भी करें जाप
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
इस मंत्र का 108 बार जाप करें
ॐ चं चं चं चंद्रघंटायेः हीं।
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