गुरू प्रदोष व्रत: जानें इस व्रत की महिमा एवं पूजा विधि

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चातुर्मास का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, जो कि 1 जुलाई से चातुर्मास आरंभ हो चुका है। धर्म ग्रंथों के अनुसार चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करने के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं और पृथ्वी की बागडोर भोलेनाथ को सौंप जाते हैं। ऐसे में इस माह में भोलेनाथ की पूजा का अत्यधिक महत्व होता है। आज भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत है और ये अन्य दूसरे व्रतों से अधिक शुभ एवं महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरूवार को आने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। 

इस दिन भोलेनाथ की पूजा की जाती है। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। गुरूवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला होता है। आइए जानते हैं इस व्रत की पूजा विधि के बारे में...

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प्रदोष काल पूजा का समय
शाम की पूजा का मुहूर्त शाम 7 बजकर 19 मिनट से 
                                रात  9 बजकर 21 मिनट तक  

गुरुप्रदोष व्रत पूजा विधि
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर सभी नित्य कामों से निवृत्त होकर भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए। 
- स्नान के बाद इस व्रत का संकल्प करें। 
- इस दिन भूल कर भी कोई आहार न लें। 
- शाम को सूर्यास्त होने के एक घंटें पहले स्नान करके सफेद कपड़े पहनें। 
- इसके बाद ईशान कोण में किसी एकांत जगह पूजा करने की जगह बनाएं।
- अब सबसे पहले गंगाजल से उस जगह को शुद्ध करें फिर इसे गाय के गोबर से लिपे। 

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- इसके बाद पद्म पुष्प की आकृति को पांच रंगों से मिलाकर चौक को तैयार करें।
- अब आप कुश के आसन में उत्तर-पूर्व की दिशा में बैठकर भगवान शिव की पूजा करें। 
- भगवान शिव का जलाभिषेक करें साथ में ऊं नम: शिवाय: का जाप भी करते रहें। 
- इसके बाद विधि-विधान के साथ शिव की पूजा करें। 
- आखिर में इस कथा सुनकर आरती करें और प्रसाद सभी को बाटें। 



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Guru Pradosh Vrat: Learn glory and worship method of this fast
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